Friday, November 4, 2011

Sapne





वो वहां नीली झील के पीछे रोज़ रात सपने बरसते हैं
बड़े, छोटे, पतले, मोटे, सुंदर और बड़े अजीबोगरीब सपने
कुछ उस झील में गिर के डूब जाते हैं
और बचे हुए सुबह ओस जैसे हवा में घुल जाते हैं

देखना कभी सूरज उगने से पहले वहां जाके
नंगे पैर जाना, आहिस्ता से
और कोई सपने संभाल के हथेली पे रख के घर ले आना


यह सपने पहले जैसे भी दीखते हो
पर फिर जिसके साथ रहते हैं, उस ही की तरह दिखने और सोचने लगते हैं
तो अगर तुम्हे तुम्हारे घर में ही कोई तुमसा दिख जाये
तो याद रखना तुम कौन हो और सपना कौन है
क्यूँकी तुम तो सिर्फ तुम हो
और सपने
वो वहां नीली झील के पीछे रोज़ रात  बरसते हैं